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Thursday, December 29, 2011


अपने ही दंश से पीड़ित जनता
(संदर्भ लोकपाल बिल की गर्भ में हत्या )


भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता को अपनी मोमबत्ती पर्व मना रुदालीगान करने की आदत से अब पीछा छुड़ाना होगा, उसे यह समझने में देर नह करनी चाहिए की शहीदों की दिलाई हुई आजादी को उसने राजनीतिक हथंडों के रास्ते राजनीतिक दलों के हाथों गिरवी रख दिया है। वोट बैंक की सियासत करने में महारत रखने वाले राजनीतिक दल अपने दांव चलकर समूचे परिदृय को बदलने का माद्दा रखते हैं। भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए सबसे पहले हमें अपने अंदर पनपने वाले लालच व स्वार्थ के कीटाणु को नष्ट करना होगा साथ ही स्वयं आत्मजागरूक होकर मैदान में आना होगा, कब तक दूसरों को और टीवी पर मच रहे हो हल्ले को देखकर नींद से बनावटी जागते रहेंगे अब मुद्दे पर आते हैं-लोकपाल को लेकर सभी राजनैतिक दल अपने-अपने स्वार्थों के तहत राजनीति कर रहे थे, सुरंग में फंसी कांग्रेस बीजेपी के बढते कद से सकते में थी लेकिन कांग्रेस के चाल चलते ही बीजेपी समेत सभी राजनीतिक दल ढेर हो गए। कांग्रेस ने लोकपाल बिल को पटल पर रखने से पहले इक-ए-मुस्लमां के तहत संविधान के विरुद्ध  मुस्लिमों को ओबीसी के कोटे से
4.5 फीसदी का आरक्षण देकर समाजिक आंदोलन को राजनीतिक रंग दे दिया है (धर्म अनुसार आरक्षण की इजाजत संविधान में नहीं है)।घूमने के बजाए तिहाड़धाम की यात्रा पर चले गए होते। ऐसे में अपने ही दंश से पीड़ित देश की जनता को नए सिरे से विचार करना होगा और खुद के अंदर के भ्रष्टाचार को खत्म कर वोटबैंक पर विस्वास करने वाले राजनीतिक दलों सोचने पर मजबूर करना होगा।जिस पर कल तक कांग्रेस को कठघे में खड़ा करने वाली भाजपा ने हंगामा भी किया और लोकसभा में पेश बिल के विरोध में वोटिंग भी की। बिल तो ध्वनिमत से पारित हो गया लेकिन बिल को संवैधानिक दर्जे सम्बन्धी प्रस्ताव सदन में गिर गया। अब बिल को राज्यसभा में पेश किया जाना है जहां सरकार के पास बहुमत नह है ऐसे में अगर यह बिल भी ठंडे बस्ते में जाएगा तो उसका ठीकरा कांग्रेस के सिर नह फूटेगा, भले ही बीजेपी संविधान की दुहाई देती रहे लेकिन अब कांग्रेस के पास यह कहने को है कि हम तो मजबूत लोकपाल चाहते थे मगर विपक्ष ने साथ नह दिया। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में भ्रष्टाचार और लोकपाल पर सिर से पांव तक कालिख पुतवा चुकी कांग्रेस के पास जनता के सामने जाने के लिए जमीन होगी। केंद्र की सत्ता में अहम भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की जनसंख्या कुल आबादी में 18 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती है (वर्ष 2०1० के अनुसार)। कांग्रेस का यह पैंतरा यह बताने के लिए पर्याप्त है कि सत्ता के लिए कोई मुद्दा मायने नह रखता, मायने रखता है तो वह सिर्फ वोटबैंक है। ऐसा नह कि भ्रष्टाचार की परिभाषा देश की जनता को अन्ना और उनकी टीम ने बताई हो, इससे सभी पहले से वाकिफ भी थे और अपने-अपने स्तर सभी भ्रष्टाचार कर भी रहे थे। जनता अगर इससे पीछा छुड़ाना चाहती तो भ्रष्टाचार के मामलों में सने रहने वाले मुलायम सिंह, मायावती, जयललिता आदि स्वघोषित नेता सत्ता के इर्द-गिर्द घूमने के बजाए तिहाड़धाम की यात्रा पर चले गए होते। ऐसे में अपने ही दंश से पीड़ित देश की जनता को नए सिरे  से विचार करना होगा और खुद के अंदर के भ्रष्टाचार को खत्म कर वोटबैंक पर विवास करने वाले राजनीतिक दलों सोचने पर मजबूर करना होगा।

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